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उज्जैन में फिर तेज बारिशः कई जगह उखड़े पंडाल, एक की मौत-कई जख्मी

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सोमवार को तेज आंधी के कारण उज्जैन के इलाके में कई जगहों पर पंडाल उखड़ गए।

सोमवार को तेज आंधी के कारण उज्जैन के इलाके में कई जगहों पर पंडाल उखड़ गए।

उज्जैन. सिंहस्थ में एक बार फिर बारिश और आंधी ने खलल डाला है। सोमवार को तेज बारिश और आंधी के चलते कई जगहों पर पंडाल गिरे हैं। इसमें एक शख्स की मौत हो गई है जबकि कई गंभीर रूप से जख्मी हैं। आंधी-पानी के कारण दूसरे शाही स्नान में भी लोगों को दिक्कतें हुईं। रामघाट पर क्षिप्रा नदी में नाले का पानी बहकर आने से श्रद्धालु परेशान हुए। बता दें कि 7 मई को भी उज्जैन में तेज आंधी और बारिश के कारण 300 से ज्यादा पंडाल गिर गए थे। 7 की मौत हुई थी। वेदर डिपार्टमेंट ने दे रखी है चेतावनी…

– उज्जैन में वेदर डिपार्टमेंट ने बारिश और आंधी के चेतावनी पहले ही दे रखी है।
– मौसम विभाग भोपाल ने कहा था कि दूसरे शाही स्नान के दौरान 50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी।
– यहां के कलेक्टर कवींद्र कियावत ने सभी जोनल, सेक्टर मजिस्ट्रेट को किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है।

सोमवार को क्या हुआ?

– सोमवार को तेज आंधी के कारण मंगलनाथ इलाके में कई जगहों पर पंडाल उखड़ गए।
– कई पंडालों में पानी भरने से साधु-संत सहित श्रद्धालु परेशान हो रहे हैं।
– मेला क्षेत्र स्थित कम्प्यूटर बाबा के पंडाल का गेट फिर से गिर गया है।
– आंधी से मेघदूत ढाबे के सामने एक बड़ा टॉवर गिर गया है।
– उत्तर प्रदेश के सीतापुर के रहने वाले जितेंद्रनाथ पिता शिवानंद शर्मा (65) की मौत हो गई है।
– उजड़खेड़ा क्षेत्र में बारिश के दौरान एक पंडाल में रुक गए थे। पंडाल गिर गया, जिससे इन्हें गंभीर चोटें आई थीं।
– वहीं, दत्त अखाड़ा, रामघाट में बारिश के दौरान एक युवक बचने के लिए एक टीनशेड में गया, जहां पहले ही कुछ नागा साधु थे। साधुओं ने युवक को डंडे से पीट दिया। जिससे उसके सिर पर गंभीर चोट आई है। युवक का नाम भविष्यकुमार है। वह खंडवा का रहने वाला है।

7 मई को क्या हुआ था?
– उज्जैन में गुरुवार शाम अचानक हुई तेज बारिश और आंधी में एक साधु और तीन महिलाओं समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 80 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
– बारिश के कारण सिंहस्थ मेला क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा था।

सिंहस्थ एक नजर में
– उज्जैन स्थित महाकालेश्वर देश के बारह ज्योतिर्लिंग में एक है और यहां 12 साल में सिंहस्थ होता है।
– 2004 के मेले में करीब तीन करोड़ श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। यह आंकड़ा इस साल के सिंहस्थ में करीब 5 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।
– क्षिप्रा के किनारे 8.5 किमी लंबे घाट पर मेला क्षेत्र डेवलप किया गया है।
– सिंहस्थ में शुरुआती तौर पर करीब 3 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।
– मेला खत्म होने तक करीब 5000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
– 70 हजार से ज्यादा की पुलिस फोर्स सिंहस्थ के दौरान तैनात हैं।
– 13 अखाड़ों और किन्नर अखाड़े को मिलाकर 14 अखाड़ों में साधु-संत यहां आए हैं।

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