राजनीति
करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस में उठी ‘सर्जरी’ और ‘एक्शन’ की मांग
करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस में उठी ‘सर्जरी’ और ‘एक्शन’ की मांग
विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद कांग्रेस ने फिर हड़कंप मचा हुआ है. कांग्रेस की हर बड़े राज्य में हार हुई है. कर्नाटक के अलावा अब किसी बड़े राज्य में कांग्रेस की सरकार नहीं रह गई है. केरल और असम में सरकार गई. केरल औऱ पश्चिम बंगाल में गठबंधन के प्रयोग नाकाम हुए. ये सब तब हुआ है जब कांग्रेस को अगले साल जूझना है पंजाब और यूपी में चुनाव से. अब दिग्विजय सिंह ने कहा है कि पार्टी को बड़ी सर्जरी की जरूरत है. शशि थरूर ने भी एक्शन की बात कही है लेकिन कोई राहुल गाँधी पर सवाल उठाने को तैयार नहीं हैं जो कांग्रेस का चेहरा बने हुए हैं.
जिस केरल में कांग्रेस की हार हुई है वहीं से शशि थरूर सांसद हैं. अब थरूर ने भी कहा है कि कांग्रेस को नया जोश, नया खून चाहिए. एक्शन की जरूरत है. जवान चेहरे, नई सोच की जरूरत है लेकिन थरूर भी राहुल गांधी पर सवाल उठाने को तैयार नहीं हैं.
इस भीषण हार पर कांग्रेस के ज्यादातर नेता दिन भर आत्ममंथन की बात कहकर टालमटोल करते रहे लेकिन रात होते-होते कांग्रेस महासचिव और दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने बड़ा ट्वीट दाग दिया. दिग्विजय ने लिखा, ‘चुनाव नतीजे निराशाजनक हैं लेकिन ये तो होना ही था. हम लोग बहुत आत्ममंथन कर चुके हैं, क्या अब पार्टी को बड़ी सर्जरी की जरूरत नहीं है?
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ऐसे समय में जब हार के बाद कांग्रेस राहुल और सोनिया के बचाव में पूरी ताकत झोंक रही है, दिग्विजयसिंह का ट्वीट पार्टी के अंदर उथल पुथल मचा सकता है. पार्टी के एक और कद्दावर नेता और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी कुछ ऐसा ही इशारा कर रहे हैं. वीरभद्र सिंह ने कहा है कि ये तो होना ही थी, ये बीजेपी की जीत नहीं- हमारे लोगों को तोड़ लिया.
असम में कांग्रेस की करारी हार की वजह हेमंत विस्वा शर्मा की पार्टी से विदाई औऱ बदरुद्दीन अजमल से गठबंधन न होना भी माना जा रहा है. लेकिन पार्टी सीधे मुंह ये मानने को तैयार नहीं है.
2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जब महज 44 सीटों पर सिमट गई थी तब से पार्टी में आत्मनिरीक्षण की बात हो रही है. राहुल गांधी को पार्टी की कमान सौंपने की तैयारी भी चल रही है. ऐसे में दिग्विजय सिंह की तरफ से पार्टी में सर्जरी की जरूरत अंदरखाने कई लोगों की आवाज बन सकती है.
कांग्रेस मुक्त भारत की ओर बढ़ा देश?
15 साल तक कांग्रेस की मुट्ठी में रहे असम में बीजेपी का कमल खिल गया है तो कांग्रेस ने अपने खाते से दूसरे राज्य केरल को भी गंवा दिया है. पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में आए नतीजों ने साफ संकेत दे दिया है कि तीन साल पहले दिया गया बीजेपी का कांग्रेस मुक्त भारत का नारा हकीकत बनता जा रहा है.
अब बीजेपी दावा कर रही है कि पांच राज्यों के ताजा नतीजों ने कांग्रेस मुक्त भारत के नारे को हकीकत में बदल दिया है. 15 साल तक कांग्रेस की मुट्ठी में रहे असम में बीजेपी का कमल खिल गया है तो कांग्रेस ने अपने खाते से दूसरे राज्य केरल को भी गंवा दिया है. पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में आए नतीजों ने साफ संकेत दे दिया है कि तीन साल पहले दिया गया बीजेपी का कांग्रेस मुक्त भारत का नारा हकीकत बनता जा रहा है.
अब बीजेपी दावा कर रही है कि पांच राज्यों के ताजा नतीजों ने कांग्रेस मुक्त भारत के नारे को हकीकत में बदल दिया है. पांच विधानसभा चुनावों के नतीजे के बाद महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश राजस्थान गुजरात झारखंड असम छत्तीसगढ़ हरियाणा और गोवा यानी 8 राज्यों में रहने वाली 35.6 फीसदी आबादी पर बीजेपी राज कर रही है – वहीं 4 राज्य ऐसे हैं जहां बीजेपी गठबंधन सरकार का हिस्सा है. इन्हें भी जोड़ दें देश के 12 राज्यों की करीब 43 फीसदी आबादी पर बीजेपी राज कर रही है.
असम ही नहीं बाकी राज्यों में भी बीजेपी ने अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की है. पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने 3 सीटें जीतकर अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है, और 10 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए हैं. वहीं लेफ्ट का गढ़ माने जाने वाले केरल में पिछली बार 6 फीसदी वोट हासिल करने वाली बीजेपी ने इस बार करीब 11 फीसदी वोट हासिल किए हैंय. हालांकि तमिलनाडु में बीजेपी को करीब 3 फीसदी वोट ही मिल पाए हैं.
दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे बुरे दिनों का संकेत दे रहे हैं. कर्नाटक, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, पुदुच्चेरी यानी इन 7 राज्यों की करीब 7 फीसदी आबादी कांग्रेस शासित राज्यों में रहती है. और अगर कांग्रेस के गठबंधन वाले राज्य बिहार जहां कांग्रेस की अपनी हैसियत ज्यादा नहीं है उसे भी जोड़ दें तो अब कांग्रेस का असर 8 राज्यों की कुल 15.58 फीसदी आबादी पर ही बचा है.
पांच विधानसभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस ने सिर्फ दो राज्य ही नहीं खोए बल्कि पश्चिम बंगाल में लेफ्ट के साथ किया गया उसका गठबंधन काम नहीं आया. वहां ममता बनर्जी का जादू फिर सिर चढ़कर बोला. तमिलनाडु में करुणानिधि की डीएमके के साथ कांग्रेस के गठबंधन को भी जनता ने नकार दिया है.
साल 2006 में उत्तराखंड, कर्नाटक, हिमाचल, मणिपुर, मेघालय, पुदुच्चेरी, दिल्ली, तमिलनाडु, असम. हरियाणा, महाराष्ट्र, अरुणाचल, पंजाब, सिक्किम, आंध्र, जम्मू और कश्मीर और केरल को मिलाकर देश के 17 राज्यों में कांग्रेस का शासन था लेकिन 10 साल में 9 राज्य गंवाकर 2016 में वो सिर्फ 8 राज्यों में सिमट कर रह गई है जिसमें सिर्फ कर्नाटक को ही बड़ा राज्य कहा जा सकता है.
कांग्रेस के लिए ये संकेत अच्छे नहीं है जबकि बीजेपी इसे मौके की तरह देख रही है. बिहार, बंगाल जैसे बड़े आबादी वाले राज्यों में बीजेपी चुनाव नहीं जीत सकी लेकिन अब बड़ा दांव यूपी पर है. जहां अगले साल चुनाव है. ताजे नतीजों ने उसे हौसले से भर दिया है अगर यूपी में लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन बीजेपी दोहरा पाती है तो फिर लगभग दो-तिहाई भारत उनकी मुट्ठी में आ सकता है.