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जीएसटी बिल पास करवाने के लिए सरकार ने बनाया ये प्लान
जीएसटी बिल पास करवाने के लिए सरकार ने बनाया ये प्लान
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) बिल सरकार के लिए सिरदर्दी बना हुआ है। लोकसभा में तो सरकार ने बिल पास करवा लिया, लेकिन राज्यसभा में सरकार अल्पमत में होने के कारण बिल लटका हुआ है। अब ताजा राज्यसभा चुनाव के बाद स्थिति थोड़ी बदली है। सरकार का पूरा प्रयास है कि इस बार बिल राज्यसभा से हर हालत में पास हो जाए। इसके लिए सरकार ने खास रणनीति तैयार की है…।
अभी सरकार के पक्ष में ये है आंकड़ा
जीएसटी के पक्ष में समाजवादी पार्टी, टीएमसी, एनसीपी,जेडीयू, बीजू जनता दल, बहुजन समाज पार्टी ने पहले से ही सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया है। इन दलों के समर्थन के बाद सरकार के पक्ष में 141 का आंकड़ा आता है, जो जादुई आंकड़े 164 से 23 कम है। अगर जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके के रुख में बदलाव आता है तो भी सरकार के पास 10 सांसदों का समर्थन कम रहेगा।
अहम है जयललिता का रुख
जीएसटी के विरोध में कांग्रेस , राजद और वाम दल हैं। इन दलों के समर्थन में कुल 80 सदस्य हैं। केंद्र सरकार को बिल पारित कराने के लिए 245 सदस्यों वाली राज्य सभा में 164 सांसदों का समर्थन चाहिए। एआईएडीएमके के पास 13 सांसद हैं। जललिता का कहना है कि मैन्यूफैक्चरर राज्य होने की वजह से उन्हें नुकसान होगा। हालांकि केेंद्र सरकार को भरोसा है कि जललिता भी जीएसटी का समर्थन करेंगी। एआईएडीएमके को लेकर दो तरह के हालात हैं। या तो वो जीएसटी बिल का समर्थन करें या जीएसटी पर मतदान के वक्त उनके सांसद लोकसभा मेें गैरहाजिर रहें। अगर जयललिता के सांसद गैरहाजिर रहते हैं तो जीएसटी को पारित कराने के लिए 145 सांसदों की जरूरत होगी। इस हालात में भी सरकार के पास 145 के जादुई आंकड़े से 14 सांसदों का समर्थन कम रहेगा।
सचिन व रेखा पर भी होगी नजर
वाइएसआर कांग्रेस, तेलंगाना राष्ट्रीय समिति, जनता दल सेक्युलर और निर्दलीय सांसदों का रुख अभी साफ नहीं है। सरकारी सूत्रों को भरोसा है ये दल सरकार को समर्थन कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि अगर ये दल जीएसटी के समर्थन में आते हैं तो कांग्रेस राज्यसभा की कार्यवाही को बाधित कर सकती है। इसके अलावा सचिन तेंदुलकर और रेखा पर सस्पेंस है कि क्या वो जीएसटी का समर्थन करेंगे या कांग्रेस के साथ जाएंगे।
…नहीं तो ये रास्ता अपनाएगी सरकार
वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि सरकार चाहती है कि जीएसटी बिल सर्वसम्मति से पारित हो। अगर किसी तरह की अड़चन आती है, तो मतविभाजन ही एक मात्र रास्ता बचेगा। कांग्रेस का कहना है कि वो चाहती है कि बिल सर्वसम्मति से पारित हो, लेकिन उन्हें बिल के कुछ प्रावधानों पर ऐतराज है। इन सब मतभेदों के बावजूद सत्ता पक्ष को यकीन है कि मानसून सत्र में इस बिल को पारित करा लिया जाएगा।
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