दुनिया
मोदी से मिले चीन के मंत्रीः NSG पर कहा- दोनों देश एक-दूसरे से असहमति का कारण खोजें
चीन एनपीटी पर साइन करने को एनएसजी मेंबरशिप के लिए जरूरी बताता रहा है।+1
चीन एनपीटी पर साइन करने को एनएसजी मेंबरशिप के लिए जरूरी बताता रहा है
चीन के फॉरेन मिनिस्टर वांग यी 3 दिन के भारत दौरे पर आए हैं। शनिवार को यी ने नरेंद्र मोदी से प्रधानमंत्री निवास पर मुलाकात की। इसमें न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) मेंबरशिप के मुद्दे को लेकर भी चर्चा हुई। चीन का कहना है, “दोनों देशों को एक-दूसरे से असहमति का कारण खोजना चाहिए।” बता दें कि चीन लगातार भारत का एनएसजी मेंबरशिप को लेकर विरोध कर रहा है।चीनी सरकारी मीडिया ने क्या कहा…
– शुक्रवार को चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ ने भी कहा कि भारत को एनएसजी की मेंबरशिप न मिल पाने की पीछे चीन को जिम्मेदार बताना बंद करना चाहिए।
– चीनी स्टेट मीडिया ने ये भी कहा, “नई दिल्ली को मेंबरशिप के मुद्दे पर निराश नहीं होना चाहिए। एनएसजी के दरवाजे अभी पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं।”
– हालांकि, ये भी कहा कि एनएसजी में ऐसे किसी देश को एंट्री नहीं मिलनी चाहिए, जिसने नॉन-प्रोलिफिरेशन ट्रीटी (परमाणु अप्रसार संधि-NPT) पर साइन न किए हों।
– 23-24 जून को सिओल में एनएसजी प्लेनरी की मीटिंग में भारत को मेंबरशिप नहीं मिल पाई थी।
साउथ चाइना को लेकर भी चीन की वॉर्निंग
– 9 अगस्त को भी चीनी स्टेट मीडिया ने साउथ चाइना सी को लेकर भारत को वॉर्निंग दी थी।
– शिन्हुआ ने कहा था, “साउथ चाइना सी चीन के राष्ट्रीय हित का मुद्दा है। हमें उम्मीद है कि भारत इसमें दखलंदाजी नहीं करेगा।”
– बता दें कि हाल ही में कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने साउथ चाइना सी पर चीन के खिलाफ फैसला सुनाया था। फिलीपींस ने इसको लेकर अपील की थी। चीन ने फैसले को मानने से इनकार कर दिया था।
एनएसजी मेंबरशिप को लेकर चीन क्यों कर रहा विरोध?
– चीन का कहना है कि एनएसजी में मेंबरशिप लेने से पहले भारत को एनपीटी पर साइन करने चाहिए।
– मेंबरशिप के मुद्दे पर मनाने के लिए भारत के फॉरेन सेक्रेटरी एस. जयशंकर भी चीन गए थे।
– जून में शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की बैठक के दौरान मोदी-जिनपिंग की भी इस मुद्दे पर बात हुई थी, लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंची।
– मेंबरशिप न मिल पाने के बाद भारत ने चीन का नाम लिए बिना कहा था, “एक देश के विरोध के चलते हमें एनएसजी में एंट्री नहीं मिल पाई।”