अपराध समाचार
पत्नी-बेटी के बाद पूर्व डीजी ने बेटे के साथ लगाई फांसी, CBI को बताया जिम्मेदार
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- September 27, 2016
- By crimesoch
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पत्नी-बेटी के बाद पूर्व डीजी ने बेटे के साथ लगाई फांसी, CBI को बताया जिम्मेदार
कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री के पूर्व डीजी बी के बंसल और उनके बेटे ने आज आत्महत्या कर ली। बंसल पर रिश्वत लेने का आरोप था। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें उन्होंने सीबीआई पर परेशान करने का आरोप लगाया है। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा है कि सीबीआई उन्हें टॉर्चर कर रही थी।
बीके बंसल ने मधु विहार दिल्ली में अपने फ्लैट के उसी कमरे में फांसी लगाकर खुदकुशी की, जिसमें उसकी पत्नी ने खुदकुशी की थी। दूसरे कमरे में बेटे ने खुदकुशी की जिसमें बंसल की बेटी ने खुदकुशी की थी।
बंसल के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई की जांच चल रही थी। लगभग दो महीने पहले ही बंसल की पत्नी और बेटी ने नीलकंठ अपार्टमेंट्स स्थित अपने आवास पर पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। दोनों ने अलग-अलग सुसाइड नोट छोड़े थे, जिनमें कहा गया था कि सीबीआई की छापेमारी से भारी बदनामी हुई है और वे इसके बाद जीना नहीं चाहतीं। हालांकि उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया था।
बंसल और उनका बेटा आज अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी बंसल को एक प्रसिद्ध दवा कंपनी से कथित तौर पर रिश्वत लेने के आरोप में सीबीआई ने 16 जुलाई को गिरफ्तार किया था। इस मामले के सिलसिले में सीबीआई ने आठ स्थानों पर छापेमारी की थी। एजेंसी ने इस छापेमारी के दौरान नकदी बरामद करने का दावा किया था।
बंसल को बाद में गिरफ्तार किया गया था लेकिन फिर जमानत पर रिहा कर दिया गया था। पुलिस ने कहा कि बी के बंसल और उनके बेटे ने कथित तौर पर फांसी लगाकर जान दे दी। उनके शव सुबह नौ बजे नौकरानी ने देखे। दोनों ने दो अलग-अलग सुसाइट नोट छोड़े हैं और पुलिस मामले की जांच कर रही है। बंसल की पत्नी सत्यबाला (57) और बेटी नेहा (27) ने जुलाई में आत्महत्या कर ली थी।
कोर्ट ने बंसल को जुलाई अग्रिम जमानत दे दी थी ताकि वह पत्नी, बेटी के अंतिम संस्कार के बाद रीति-रिवाज निपटा सकें। बाद में उन्हें नियमित बेल दे दी गई। सीबीआई कोर्ट के जज गुरमीत सिंह ने जमानत देते वक्त कहा था, ‘एजेंसी को सोचना होगा कि ऐसे मामले में उन्हें गिरफ्तार किया जाए या नहीं। ये हत्या के जैसा मामला नहीं है। पहले सीबीआई इस तरह के मामलों में गिरफ्तारी नहीं करती थी। अन्ना हजारे के आंदोलन और इस तरह के दूसरे आंदोलनों के चलते गिरफ्तारी होने लगी है।’
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