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अपराध समाचार
नोटबंदी का असर अपराध पर, क्राइम रेट में जबरदस्त गिरावट

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नोट बंदी का ऐलान दिल्ली के बदमाशों के लिए किसी सर्जिकल स्ट्राइक से कम नजर नहीं रहा है. आलम ये है कि दिल्ली की सड़कों पर होने वाले अपराधों में कमी आई है और इससे पुलिस अधिकारियों के चेहरे भी खिले हुए हैं.

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पिछले एक महीने में यानि 9 नवम्बर से 8 दिसम्बर 2016 तक दिल्ली के क्राइम में रिकॉड तोड़ गिरावट दर्ज की गई है. साल 2015 में इसी समय में जहां क्राइम का आंकड़ा काफी ऊँचा था, वहीं इस बार कई अपराधों में ये आंकड़ा काफी हद तक कम नजर रहा हैं.

एक महीने की बात करे तो नोटबंदी के ऐलान के बाद से ही दिल्ली में अब तक बड़ी लूटपाट व झपटमारी की घटना सामने नहीं आई है. ऐसा माना जा रहा है क्राइम के इस ग्राफ का गिरना नोट बंदी का एक असर है जो पूरी दिल्ली में देखने को मिल रहा है.

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दिल्ली पुलिस के आंकड़ों की माने तो पिछले साल 9 नवम्बर से 8 दिसम्बर 2015 तक दिल्ली शहर में हत्या की कोशिश 66, लूटपाट के 561, स्नैचिंग के 843, किडनैपिंग के 498 और उगाही के 20 मामले दर्ज किए गए थे. कुल जघन्य अपराध का आंकड़ा 842 था.

साल 2016 में ये आंकड़ा काफी कम हो गया है. हत्या की कोशिश 36, लूटपाट के 315, स्नैचिंग के 734, किडनैपिंग के 426 और उगाही के 9 मामले सामने आए हैं. कुल जघन्य अपराध का आंकड़ा 560 रहा है.

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यही नहीं कुछ जुर्म के मामले ऐसे भी हैं जिनमें पिछले साल के मुकाबले इस साल 9 नवम्बर से 8 दिसम्बर की तारीख के बीच इजाफा भी देखने को मिला है. पिछले साल 2015 में 1075 सेंधमारियां हुई थीं, जो इस बार बढ़ कर 1136 हो गईं. घरों में चोरियां भी 990 से बढ़ कर 1021 हो गईं. अवैध शराब के खिलाफ दर्ज केसों की संख्या 141 से बढ़ कर 202 हो गई.

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