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छात्राओं ने नहीं भरी फीस तो स्कूल ने भेज दिया थाने

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स्कूल में फीस नहीं भरने पर स्टूडेंट्स को घर भेजने के बजाए पुलिस थाने भेजने का मामला सामने आया है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सेंट जेवियर स्कूल प्रबंधन द्वारा यह ह‍रकत की गई है. मामला दो लड़कियों के फीस नहीं भरने का है. इस विवाद में स्कूल ने छात्राओं को अभिभावकों को सौंपने की जगह थाने भेज दिया.

आपको बता दें कि तेलीबांधा इलाके में स्थित सेंट जेवियर स्कूल में यह विवाद सामने आया है. सूत्रों के अनुसार इन दो लड़कियों के अभिभावकों द्वारा दो साल से फीस नहीं दी गई है. फीस को लेकर उनके अभिभावकों का स्कूल प्रबंधन से विवाद चल रहा है. फीस का यह विवाद अदालत तक भी जा पंहुचा है.

हालांकि थाने भेजने से उपजे इस विवाद से पुलिस, स्कूल प्रबंधन और अभिभावक आमने सामने आ गए हैं. वहीं थाना इस मामले में बचाव की मुद्रा में है. पुलिस के अनुसार उन्होंने छात्राओं को थाने में नहीं बिठाया और न ही पुलिस ने स्कूल से छात्राओं को थाने लाया.

वहीं स्कूल प्रबंधन का कहना है कि अभिभावकों ने पिछले दो साल से फ़ीस नहीं दी है. इसके चलते छात्राओं को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गयी है और ना ही छात्राओं के नाम क्लास रजिस्टर में दर्ज किया गया है. स्कूल प्रबंधन के अनुसार दोनों छात्राओं को जबरदस्ती स्कूल भेजा जा रहा था तो वह बच्चों को सड़क पर नहीं छोड़ सकते थे. यही वजह है कि उन दोनों छात्राओं को थाने ले जाना पड़ा.

वहीं अभिभावकों के अनुसार थाने ले जाने से पहले स्कूल प्रशासन को एक बार उन्हें सूचना देनी चाहिए थी. छात्राएं नाबालिग हैं. थाना ले जाने की वजह से वे दोनों बुरी तरह डर गई हैं. अभिभावक के मुताबिक स्कूल प्रबंधन ने ना तो अभिभावक समिति बनाई है और ना ही नियमानुसार फ़ीस वृद्धि की है. हर वर्ष स्कूल प्रबंधन गैर क़ानूनी ढंग से फ़ीस वृद्धि कर रहे हैं. इसकी शिकायत उन्होंने शिक्षा विभाग से की है. उनके मुताबिक जब तक कोई ठोस हल नहीं निकल जाता वे नियम के खिलाफ लादी गयी फ़ीस नहीं भरेंगे.

फ़ीस ना जमा करने पर छात्रा को थाने ले जाने का यह पहला मामला है. इस घटना के बाद कई अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन को आड़े हाथों लिया है. जिला शिक्षा अधिकारी एएन बंजारा के मुताबिक दोनों पक्षों की बातों को सुनने के बाद वे कोई कार्रवाई करेंगे. फिलहाल इस घटना पर कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए, अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

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