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जानें क्या है नरोदा पाटिया नरसंहार, जिसमें कर दी गई 97 लोगों की नृशंस हत्याई दिल्ली: साल 2002 में नरोदा पाटिया में हुए नरसंहार के केस में मुख्य आरोपियों में से एक पूर्व मंत्री व भाजपा की तत्कालीन विधायक मायाबेन कोडनानी को गुजरात हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है. वहीं मामले के एक अन्य आरोपी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी को कोर्ट ने दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. गुजरात दंगों के दौरान नरोदा पाटिया में हुई हिंसा में करीब 97 लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई थी, जबकि 33 अन्य घायल हुए थे. इस केस में सुनवाई साल 2009 में शुरू हुई थी. गोधरा में 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में हुए अग्निकांड के अगले ही दिन विश्व हिंदू परिषद के बंद का ऐलान किया था. 28 फरवरी 2002 को विश्व हिंदू परिषद के बंद दौरान नरोदा पटिया में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे उग्र भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया इस हमले में 97 लोगों की मौत हो गई, जबकि 33 लोग घायल हो गए नरोदा पाटिया नरसंहार को गुजरात दंगों के दौरान हुआ सबसे भीषण नरसंहार बताया जाता है इस नरसंहार मामले की जांच एसआईटी ने की थी. अगस्त, 2009 में इस मामले में सुनवाई शुरू की गई. 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए. सुनवाई के दौरान ही एक आरोपी विजय शेट्टी की मृत्यु हो गई. मामले में 327 लोगों की गवाही ली गई थी. एसआईटी ने गुजरात सरकार में तत्कालीन मंत्री माया कोडनानी से पूछताछ की. बाद में उनकी गिरफ्तारी हुई, और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. हालांकि, वो रिहा हो गईं और इस दौरान विधानसभा जाती रहीं. माया कोडनानी पर आरोप लगा कि उन्होंने नरोदा पटिया में भाषण देकर लोगों को अल्पसंख्यकों पर हमले के लिए उकसाया था. 29 अगस्त 2012 में गुजरात की एक विशेष अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया. माया कोडनानी बाद में जमानत मिल गई. 20 अप्रैल 2018 को माया कोडनानी को बरी कर दिया गया. मामले की सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने एसआईटी की विशेष अदालत के फैसले को पलटते हुए माया कोडनानी की सजा को खत्म कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस मालमे में माया कोडनानी निर्दोष हैं. उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं. माया कोडनानी के बरी होने पर मिले ये रिएक्शन
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- April 20, 2018
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ई दिल्ली: साल 2002 में नरोदा पाटिया में हुए नरसंहार के केस में मुख्य आरोपियों में से एक पूर्व मंत्री व भाजपा की तत्कालीन विधायक मायाबेन कोडनानी को गुजरात हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है. वहीं मामले के एक अन्य आरोपी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी को कोर्ट ने दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. गुजरात दंगों के दौरान नरोदा पाटिया में हुई हिंसा में करीब 97 लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई थी, जबकि 33 अन्य घायल हुए थे. इस केस में सुनवाई साल 2009 में शुरू हुई थी.
गोधरा में 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में हुए अग्निकांड के अगले ही दिन विश्व हिंदू परिषद के बंद का ऐलान किया था.
28 फरवरी 2002 को विश्व हिंदू परिषद के बंद दौरान नरोदा पटिया में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे
उग्र भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया
इस हमले में 97 लोगों की मौत हो गई, जबकि 33 लोग घायल हो गए
नरोदा पाटिया नरसंहार को गुजरात दंगों के दौरान हुआ सबसे भीषण नरसंहार बताया जाता है
इस नरसंहार मामले की जांच एसआईटी ने की थी.
अगस्त, 2009 में इस मामले में सुनवाई शुरू की गई.
62 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए.
सुनवाई के दौरान ही एक आरोपी विजय शेट्टी की मृत्यु हो गई.
मामले में 327 लोगों की गवाही ली गई थी.
एसआईटी ने गुजरात सरकार में तत्कालीन मंत्री माया कोडनानी से पूछताछ की.
बाद में उनकी गिरफ्तारी हुई, और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.
हालांकि, वो रिहा हो गईं और इस दौरान विधानसभा जाती रहीं.
माया कोडनानी पर आरोप लगा कि उन्होंने नरोदा पटिया में भाषण देकर लोगों को अल्पसंख्यकों पर हमले के लिए उकसाया था.
29 अगस्त 2012 में गुजरात की एक विशेष अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया.
माया कोडनानी बाद में जमानत मिल गई.
20 अप्रैल 2018 को माया कोडनानी को बरी कर दिया गया. मामले की सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने एसआईटी की विशेष अदालत के फैसले को पलटते हुए माया कोडनानी की सजा को खत्म कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस मालमे में माया कोडनानी निर्दोष हैं. उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं. माया कोडनानी के बरी होने पर मिले ये रिएक्शन