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केरल में अगले 5 दिनों में बारिश में खासी कमी आने की संभावना: रिपोर्ट

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केरल में मानसून की बारिश का कहर जारी है. राज्य में 1 जून से लेकर 19 अगस्त तक 2346.6 मिली मीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 42 फ़ीसदी ज्यादा है. आमतौर पर इस अवधि में यहां 1649.5 मिमी बारिश होती है. मौसम विभाग के मुताबिक इडुक्की जिले में इस दौरान सामान्य के मुकाबले 92 फ़ीसदी बारिश ज्यादा हुई है तो वहीं पलक्कड़ में ये आंकड़ा 72 फ़ीसदी ज्यादा रहा.

मौसम विभाग के डायरेक्टर चरण सिंह के मुताबिक, अब केरल के ऊपर मानसून की बारिश अगले 5 दिनों में धीरे-धीरे कम होती चली जाएगी. यह एक राहत भरी खबर है, लेकिन इसी बीच बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बन चुका है. यह कम दबाव का क्षेत्र पूर्वी और मध्य भारत के तमाम इलाकों में मानसून की बारिश को तेज करेगा, लेकिन इसकी वजह से केरल में बारिश की संभावना नहीं है.

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून के महीने में केरल में 649.8 मिमी की सामान्य बारिश के मुकाबले 749.6 मिमी हुई. यह सामान्य से 15 फ़ीसदी ज्यादा है. जुलाई के महीने में केरल में 726.1 मिमी की सामान्य बारिश के मुकाबले 857.4 मिमी की बारिश रिकॉर्ड की गई, जो 18 फ़ीसदी ज्यादा रही.

वहीं, अगस्त में केरल में आमतौर पर 1 अगस्त से लेकर 19 अगस्त तक 287.6 मिलीमीटर की सामान्य बारिश होती है, लेकिन इस साल यह बारिश 164 फ़ीसदी बढ़कर 758.6 मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई. अगस्त की इस झमाझम बारिश ने राज्य के एक बड़े इलाके को बाढ़ में डुबो दिया.

मौसम विभाग के एडीजी महापात्रा के मुताबिक, इस बार अगस्त के महीने में केरल में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई. ऐसी बारिश आमतौर पर यहां पर अगस्त के महीने में नहीं होती है. मानसून में इस बार 14 और 20 जून को यहां झमाझम बारिश रिकॉर्ड की गई और इसका दूसरा दौर 20 जुलाई के आसपास दर्ज किया गया, लेकिन 8 से 16 अगस्त के बीच हुई मूसलाधार बारिश से राज्य में बाढ़ के हालात बने.
मौसम की जानकारी के मुताबिक, जुलाई के अंत तक केरल में सामान्य से ज्यादा बारिश की वजह से यहां पर मौजूद 35 जलाशय पानी से लबालब भर गए. इस स्थिति में जब 10 अगस्त के बाद मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ा तो इस दौरान बरसे पानी को संभालने की क्षमता इन जलाशयों में नहीं रही.

पश्चिमी घाट पर हो रही तेज बारिश के कारण जलाशयों में जबरदस्त तरीके से पानी आने लगा. पहले से ही लबालब भरे जलाशयों के गेट को प्रशासन को मजबूरन खोलना पड़ा. जिसके चलते जलाशयों के नीचे मौजूद ज्यादातर इलाकों में बाढ़ की भयानक स्थिति पैदा हो गई.

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