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जज लोया केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘न्‍यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश हो रही है’

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नई दिल्‍ली : उच्चतम न्यायालय ने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई जज बीएच लोया की कथित तौर पर संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले की जांच कराने संबंधी याचिकाओं को गुरुवार को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों और बॉम्‍बे हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाकर न्यायपालिका को विवादित बनाने की कोशिश की जा रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि लोया की मृत्यु की परिस्थितियों के संबंध में चार न्यायाधीशों के बयानों पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है. साथ ही न्‍यायालय ने कहा कि रिकॉर्ड में रखे गए दस्तावेजों और उनकी जांच यह साबित करती है कि लोया की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई है.

जानिए, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 10 अहम बिंदु…

न्‍यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश हो रही है.
जजों की विश्‍वसनीयता पर सवाल उठाना अवमानना है.
जनहित याचिका का मजाक बनाया गया है.
जज लोया की सामान्‍य मृत्‍यु हुई, इसमें कोई शक नहीं.
इस मामले की एसआईटी जांच नहीं कराई जाएगी.
कारोबारी या राजनीतिक झगड़े कोर्ट के बाहर निपटाएं.
पीआईएल की आड़ में कोर्ट का वक्‍त बर्बाद न करें.
जजों को बदनाम करने की कोशिश की गई.
आपसी मतभेद मिटाने के लिए कार्ट का सहारा न लें.
जो जज, जज लोया के साथ आखिरी वक्त तक रहे, उनके बयान पर शक करने का कोई आधार नहीं.

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