महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर घमासान जारी है. सोमवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के तुरंत बाद मुंबई में सियासी हलचल तेज हो गई. इस बड़े झटके से उबरने के लिए पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने आवास ‘मातोश्री’ पर पार्टी विधायकों की एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई. लेकिन इस बैठक ने पार्टी की चिंताएं और बढ़ा दीं, क्योंकि शिवसेना (UBT) के 4 महत्वपूर्ण विधायक इस बेहद जरूरी बैठक से नदारद रहे.
इस गैरमौजूदगी ने महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की अटकलों को हवा दे दी है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा की अगुवाई वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) महाविकास अघाड़ी (MVA) के विधायकों में सेंधमारी करने की कोशिश में है.
सोमवार को बैठक में न आने वाले विधायकों में वानी (यवतमाल) के विधायक संजय देरकर, परभणी के विधायक राहुल पाटिल, कलिना के विधायक संजय पोतनीस और विधान परिषद सदस्य (MLC) सुनील शिंदे शामिल हैं. हालांकि, पार्टी विधायक वरुण सरदेसाई ने सफाई देते हुए कहा कि इन चारों ने पहले से तय जरूरी कामों की वजह से बैठक से छूट मांगी थी. जानकारी के अनुसार, राहुल पाटिल परभणी में विधान परिषद चुनाव की काउंटिंग में व्यस्त थे.
BMC पर भी ‘ऑपरेशन टाइगर’ का खतरा
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब यह चर्चा आम है कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ का अगला निशाना बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) हो सकता है. एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ने दावा किया है कि उद्धव गुट के कई पूर्व कॉर्पोरेटर उनके संपर्क में हैं. शिंदे गुट के सूत्रों का कहना है कि जिस तरह 9 में से 6 सांसदों ने पाला बदला, ठीक उसी तरह BMC में उद्धव गुट के 65 कॉर्पोरेटर्स में से दो-तिहाई से ज्यादा उनके साथ आने को तैयार हैं. इतनी बड़ी संख्या होने के कारण इन पर दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्यता का खतरा भी नहीं रहेगा.
‘मातोश्री’ की बैठक में मौजूद विधायकों के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने अपने बचे हुए नेताओं से हर हाल में एकजुट रहने की अपील की है. वर्तमान में 20 विधायकों के साथ शिवसेना (UBT) विपक्षी ब्लॉक (MVA) में सबसे बड़ी पार्टी है. ठाकरे ने विधायकों को आगाह किया कि उन्हें पाला बदलने के लिए बड़े प्रलोभन दिए जा सकते हैं. उन्होंने बगावत करने वाले सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने अपनी वफादारी बेच दी है. विकास कार्यों का बहाना बनाकर पार्टी छोड़ना बिल्कुल झूठ है. ये लोग हमारी पार्टी को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन हमारी लड़ाई जारी रहेगी.
बागी सांसदों के गढ़ में गरजेंगे उद्धव
इस बड़े धोखे के बाद अब उद्धव ठाकरे बैकफुट से निकलकर फ्रंटफुट पर खेलने की तैयारी में हैं. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने के लिए लोकसभा अध्यक्ष और कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी. इसके साथ ही उद्धव ठाकरे 27 से 29 जून तक दलबदलू सांसदों के लोकसभा क्षेत्रों का तूफानी दौरा करेंगे. वह 27 जून को यवतमाल-वाशिम और हिंगोली जाएंगे, 28 जून को परभणी और धाराशिव (उस्मानाबाद) का रुख करेंगे, जबकि 29 जून को शिरडी में कार्यकर्ताओं को रीचार्ज करेंगे. इसके अलावा, पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए हिंगोली के बागी सांसद नागेश पाटिल-अष्टीकर के बेटे कृष्णा अष्टीकर को पार्टी से निकाल दिया गया है.
इस बीच, पूरे विपक्ष पर मंडराते ‘ऑपरेशन टाइगर’ के खतरे को देखते हुए महाविकास अघाड़ी (MVA) ने बुधवार को अपने सभी विधायकों की एक बेहद अहम और अर्जेंट मीटिंग बुलाई है. इस महा-बैठक को खुद उद्धव ठाकरे, एनसीपी (SP) चीफ शरद पवार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल संबोधित करेंगे, ताकि चुनाव से ठीक पहले विपक्ष के कुनबे को बिखरने से बचाया जा सके.
