वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने मंगलवार (23 जून ) को नई दिल्ली में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा शुरू की. ग्रीर व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं. पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि उन्होंने जैमिसन ग्रीर, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और उनके प्रतिनिधिमंडल का वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में स्वागत किया. पीयूष ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर सार्थक चर्चा की उम्मीद है.
बैठक में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और भारत के मुख्य वार्ताकार एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन भी शामिल हैं. यह बैठक इसी महीने 2 से 4 जून के बीच नई दिल्ली में हुई मुख्य वार्ताकार स्तर की वार्ता के बाद हो रही है. राजेश अग्रवाल ने 15 जून को कहा था कि दोनों मंत्रियों की बातचीत मुख्य रूप से समझौते के ढांचे को अंतिम रूप देने पर केंद्रित रहेगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 जून को कहा था कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं. इससे पहले 5 जून को पीयूष गोयल ने कहा था कि दोनों देश अंतरिम व्यापार समझौते के लंबित मुद्दों को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. दोनों पक्ष अगले महीने के मध्य तक बीटीए के पहले चरण को लागू कर सकते हैं. भारत और अमेरिका ने 13 फरवरी 2025 को औपचारिक रूप से बीटीए वार्ता शुरू की थी. 7 फरवरी 2026 को दोनों देशों ने अंतरिम समझौते के लिए एक ढांचा तैयार करने की घोषणा की थी. इसके तहत अमेरिका ने भारत पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई थी.
टैरिफ पर नई रणनीति
रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को भी हटाने की बात हुई थी, बाद में अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने इन शुल्कों को निरस्त कर दिया. समझौते के तहत भारत ने कई अमेरिकी औद्योगिक, कृषि और खाद्य उत्पादों पर शुल्क कम या समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है. साथ ही अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोल खरीदने की मंशा जताई है.
500 अरब डॉलर लक्ष्य
अमेरिका की बदली हुई शुल्क व्यवस्था के बाद दोनों देश समझौते की शर्तों पर पुनर्विचार कर रहे हैं. भारत की कोशिश है कि उसे आसियान देशों, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले शुल्क के मामले में बेहतर स्थिति मिले. अमेरिका 2025-26 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा. पिछले वित्त वर्ष में भारत का अमेरिका को निर्यात 87.3 अरब डॉलर और आयात 52.9 अरब डॉलर रहा, जबकि व्यापार अधिशेष घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया.
