बॉम्बे हाईकोर्ट से दोषी ठहराए जाने के बाद तहलका मैगजीन के संस्थापक तरुण तेजपाल का रिएक्शन आया है. उन्हें गुरुवार (6 अगस्त 2026) को 2013 के एक यौन उत्पीड़न मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई है. सजा सुनाने के बाद उन्होंने कोर्ट के इस फैसले पर घोर निराशा जताई है.
तेजपाल ने कहा है, ‘हम इस फैसले से बहुत निराश हैं. हमारा मानना है कि मामले में सबूतों पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया. हमारा मानना है कि मुझे पूरी तरह बेगुनाह साबित करने के लिए काफी सबूत मौजूद हैं. हम इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे. हम लोग इस फैसले से बिल्कुल नाखुश हैं. मुझे लगता है कि बेंच ने हमारे सबुतों को ध्यान से नहीं देखा. हम लोग अपील करेंगे और अपडेट देते रहेंगे.’
पूरा मामला साल 2013 नवंबर महीने का है. तरुण तेजपाल पर उनकी पूर्व जूनियर महिला सहकर्मी ने यौन उत्पीड़न और रेप का आरोप लगाया था. तरुण तेजपाल को 2021 में लोअर कोर्ट ने बरी कर दिया था. इसके खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की थी. इसी पर बॉम्बे हाईकोर्ट की पणजी बेंच ने यह फैसला सुनाया है.
राजनीतिक बदले की भावना का शिकार हुआ हूं: तरुण तेजपाल
उन्होंने कहा, ‘मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि मैं 62 साल का हूं. मेरा मानना है कि मैं राजनीतिक बदले की भावना का शिकार हुआ हूं. मेरी दो बेटियां हैं. मेरी पत्नी भी है. हम बस यही कह सकते हैं कि हम ऊपर अपील करेंगे.’
इसके अलावा तेजपाल ने कहा है कि उन्होंने साढ़े सात साल केस लड़ा और बरी हो गए. जो उन लोगों उनके साथ हैं, वे बरी हो जाते हैं. वे उनके पीछे पड़ते हैं, जिन्होंने उनके खिलाफ लिखा.
शरजील और उमर भी कई सालों से बंद हैं: तेजपाल
तरुण ने इसके अलावा उमर खालिजद और शरजील इमाम का भी जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि कई सालों से जेल में हैं. तहलका की रिपोर्टिंग से शायद उन्हें कुछ राजनीतिक नुकसान हुआ हो. उनके निजी हित को चोट पहुंची हो.
वे 13 सालों से मेरे पीछे पड़े हैं: तेजपाल
तरुण तेजपाल ने कहा कि वे पिछले 13 सालों से बदले की भावना से मेरे पीछे पड़े हैं. मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. ऐसे जज होंगे, जो सच देखें. हम सबूत सबके सामने रखेंगे.
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने पलटा फैसला
गोवा बेंच ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए, उन्हें दोषी करार दिया है. इस मामले की गोवा पुलिस की इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर सुनीता सांवत ने कहा है, ‘उन्हें 10 साल की कठोर कैद और 5 लाख रुपय जुर्माने की सजा सुनाई गई है. उन्हें सरेंडर करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया गया है.’.
