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Venezuela Earthquake: वेनेजुएला में भूकंप ने मचाई भयानक तबाही, मरने वालों का आंकड़ा एक हजार पहुंचा, 50 हजार से ज्यादा लोग लापता

वेनेजुएला में बुधवार (24 जून 2026) को आए दो बड़े भूकंप के बाद हालात बेहद खराब हो गए हैं. 7.2 और 7.5 तीव्रता के इन दो भूकंपों ने देश में भारी तबाही मचा दी है. इसे पिछले 100 साल से ज्यादा समय में आई सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है.जैसे-जैसे दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों से मदद पहुंच रही है, वैसे-वैसे प्रभावित लोग भी खुद मलबे में फंसे अपनों को बचाने में जुटे हुए हैं.

अब तक 920 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है. वहीं हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, क्योंकि प्रभावित इलाकों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है. सरकार के अनुसार बुधवार शाम काराकास और उसके आसपास के इलाकों में आए इन दो भूकंपों के बाद 172 लोग अभी भी मलबे में फंसे हुए हैं. 3,360 लोग घायल हुए हैं और 50,000 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं.

वेनेजुएला में लोग खुद से हटा रहे हैं मलबा

वेनेजुएला के लोग खुद राहत कार्य में जुट गए हैं. दुनिया भर से मदद पहुंचने के बावजूद स्थानीय लोगों ने राहत कार्य में धीमी गति की शिकायत की है. ऐसे में कई लोग खुद बचाव कार्य में शामिल हो गए हैं. बचे हुए लोग समूह बनाकर मलबा हटाकर अपने परिवार वालों को ढूंढ रहे हैं.AFP न्यूज एजेंसी के अनुसार 40 वर्षीय मार्जोस्ली सालाज़ार अपने 5 महीने के बेटे गेल को ढूंढ रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी 16 साल की बेटी भूकंप में मारी गई है. उनका बेटा और उनका कजिन अभी भी लापता हैं. उन्होंने कहा, ‘हमें यहां मदद चाहिए. भारी मलबा हटाने के लिए मशीनें चाहिए. हमने यहां कोई सरकारी अधिकारी नहीं देखा.’

भूकंप को लेकर एक्सपर्ट्स के बयान

एक्सपर्ट्स के अनुसार किसी भी भूकंप के बाद पहले 48 से 72 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. इसी दौरान जीवित लोगों को निकालने की सबसे ज्यादा संभावना रहती है. इसके बाद उम्मीद काफी कम हो जाती है, जब तक कि फंसे लोगों को खाना और पानी न मिल रहा हो. रेस्क्यू टीम के लीडर नाडियोमार पोलांको ने बताया कि कई इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं. उन्होंने कहा कि अब जीवित लोगों के मिलने की उम्मीद बहुत कम है और ज्यादातर कोशिशें अब शव निकालने पर केंद्रित हैं. राहत कार्य में शुक्रवार रात  को नई दिक्कत आ गई, जब अधिकारियों ने आपदा प्रभावित इलाकों में आम लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी. सरकार ने कहा कि बिना अनुमति लोगों की आवाजाही से अफरा-तफरी, ट्रैफिक और शोर बढ़ रहा है, जिससे राहत कार्य प्रभावित हो रहा है. अब वहां प्रवेश के लिए सरकारी अनुमति जरूरी होगी.

वेनेजुएला सरकार ने मामले पर क्या जानकारी दी

लोग जरूरी सामान जुटाने के लिए दुकानों, मेडिकल स्टोर और फूड ट्रकों के बाहर लंबी लाइन में खड़े हैं. कुछ इलाकों में टॉयलेट पेपर और खाने-पीने का सामान लूटे जाने की भी खबरें हैं. रोक के बावजूद कई लोग हथौड़े और मशीनों की मदद से कंक्रीट काटकर लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं. वेनेजुएला सरकार ने बताया कि मेक्सिको, अमेरिका, अल साल्वाडोर, स्विट्जरलैंड, कोलंबिया और अन्य देशों से 861 अंतरराष्ट्रीय वॉलंटियर राहत कार्य में जुटे हुए हैं. आने वाले दिनों में और मदद पहुंचने की उम्मीद है. संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि दुनिया भर से 25 सर्च और रेस्क्यू टीमें भेजी जा रही हैं, जिनमें करीब 1,000 इमरजेंसी रिस्पॉन्डर शामिल हैं.

वेनेजुएला को मिली मदद की पेशकश

वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज राहत कार्यों को तेज करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मार्को रुबियो के संपर्क में हैं. संयुक्त राष्ट्र की मानवीय एजेंसी OCHA ने बताया कि कम से कम 17 देशों की टीमें राहत कार्य के लिए भेजी जा रही हैं. स्पेन, अल साल्वाडोर, स्विट्जरलैंड, कोलंबिया और मेक्सिको की टीमें पहले से मौके पर मौजूद हैं. इस आपदा ने वेनेजुएला के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. देश पहले से आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहा है और अब यह त्रासदी हालात को और कठिन बना रही है. भारत, चीन, ब्राजील और यहां तक कि ईरान ने भी मदद की पेशकश की है. वहीं पोप लियो XIV ने शुरुआती राहत के तौर पर 1,00,000 यूरो की सहायता भेजी है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस आपदा पर गहरा दुख जताया है और वेनेजुएला को हर संभव मदद देने का भरोसा दिया है.

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