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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना इसलिए मान गए सोनम वांगचुक? कहा- ‘दो रास्ते थे या तो मर जाऊं और बच्चों पर केस होने दूं या…’

मशहूर शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने गुरुवार (23 जुलाई) की रात को अपनी भूख हड़ताल खत्म की. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बीती रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में जूस पिलाकर वागंचुक का अनशन खत्म कराया. अनशन खत्म करने के बाद सुबह सोनम वागंचुक ने वीडियो संदेश जारी कर सिलसिलेवार ढंग से सारी बातें बताईं.

सोनम वांगचुक ने कहा कि आप कहेंगे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या हुआ. पहली बात तो इस बात पर तो वो मुझे कोई आश्वासन नहीं दे पा रहे थे कि ऐसा कब होगा. उन्होंने बताया कि संसद में तो इस पर चर्चा होगी ही. वागंचुक ने बताया कि मेरे पास दो ही रास्ते थे कि अनशन पर बैठा रहूं और खत्म हो जाऊं.

उन्होंने आगे बताया कि हजारों लोगों ने मुझे कहा कि आपकी जान जरूरी है. आपको संघर्ष आगे रखना है और जिंदा रहना है. मैं ये भी नहीं मानता कि हमने हासिल नहीं किया. मेरा दिमाग अलग तरह से चलता है. उनके इस्तीफा नहीं देने से हमें या बच्चों को हानि नहीं होगी, उन्हें हानि होगी. वागंचुक ने आगे कहा कि वो (धर्मेंद्र प्रधान) इस्तीफा दे देते तो उनका सारा नुकसान रुक जाता.

सबसे जरूरी था कि बच्चों पर कोई केस न हो
संसद चलो मार्च के दौरान हुई हिंसा और पुलिस की कार्रवाई का जिक्र करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी ये था कि हमारे बच्चों पर कोई केस न हो. उन्होंने कहा कि हमने लद्दाख में देखा है कि जीवन भर एफआईआर के चक्कर में भविष्य उजड़ जाते है. इसके अलावा उन्होंने ये भी बताया कि नीट पेपर लीक की वजह से जिन भी छात्रों ने सुसाइड किया है सरकार की तरफ से उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि इसकी खुशी है. संसद में इस मुद्दे पर और जवाबदेही पर पूरी बहस होगी.

सोनम वांगचुक ने बताया कि उन्हें सरकार और सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से यह भरोसा मिला है कि भारतीय संसद में खराब होती परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी. शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा.

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