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संभल में फिर मस्जिद विवाद! बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद पहुंचेगी ASI टीम, DM ने दिए जांच के आदेश

उत्तर प्रदेश के संभल के चौधरी सराय स्थित बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद को लेकर विवाद अब जांच के अगले चरण में पहुंच गया है. आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम मौके पर पहुंचकर जांच करेगी. आरोप है कि यह मस्जिद एएसआई की संरक्षित भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई है। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल के आदेश के बाद एसडीएम विकास चंद्र के नेतृत्व में यह जांच की जा रही है.

क्या है पूरा मामला?
31 अगस्त: श्रीकल्कि सेना के राष्ट्रीय संयोजक और अधिवक्ता सुभाष चंद्र त्यागी ने जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल को शिकायत दी. शिकायत में दावा किया गया कि चौधरी सराय की बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद का निर्माण/विस्तार ASI संरक्षित भूमि पर हुआ है.  शिकायत में गाटा संख्या 170/1 और 170/3 का भी उल्लेख किया गया है. DM ने जांच SDM विकास चंद्र को सौंपी. राजस्व रिकॉर्ड और जमीन से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए. अब ASI टीम स्थल का निरीक्षण कर यह जांच करेगी कि जमीन वास्तव में ASI संरक्षित संपत्ति के दायरे में आती है या नहीं.

दोनों पक्षों के दावे
शिकायतकर्ता का दावा-मस्जिद ASI संरक्षित संपत्ति की जमीन पर अवैध रूप से बनाई/विस्तारित की गई है.

मस्जिद कमेटी का पक्ष-मुतवल्ली इरशाद ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मस्जिद वक्फ की संपत्ति पर है और यह कई सौ साल पुरानी है.

क्या बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद ASI संरक्षित जमीन पर बनी है?
अब इस सवाल का जवाब ASI की जांच और प्रशासनिक रिकॉर्ड की पड़ताल से सामने आएगा. फिलहाल किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता.

संवेदनशील इलाका
चौधरी सराय पुलिस चौकी क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि जांच प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की जा सके.

शाही जामा मस्जिद का मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
संभल में मस्जिदों से जुड़ा विवाद नया नहीं है.शहर की शाही जामा मस्जिद को लेकर पहले से विवाद चल रहा है.उपलब्ध जानकारी के अनुसार शाही जामा मस्जिद को मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर उसके सेनापति मीर हिंदू बेग ने बनवाया था और इसके निर्माण की तारीख 6 दिसंबर 1526 तक बताई जाती है.  यह मस्जिद संभल के मुहल्ला कोट में एक ऊंचे टीले पर स्थित है.शाही जामा मस्जिद के नाम पर कई संपत्तियों का भी उल्लेख किया जा रहा है.  यही वजह है कि अब ASI संरक्षित जमीन और उससे जुड़ी संपत्तियों का रिकॉर्ड प्रशासनिक जांच में महत्वपूर्ण हो गया है.

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