हालांकि चीन ने ग्लेशियर के टूटने के लिए नेपाल की तरफ भूकंप को जिम्मेदार ठहराया है. नेपाल में चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने रसुवा में आई भीषण बाढ़ पर नेपाल के चैनल से बात की. उन्होंने कहा कि कठिन समय में हम नेपाल के साथ मजबूती से खड़े हैं. वर्तमान में उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी है कि नेपाली पक्ष में एक भूकंप आया, जिससे बर्फ का हिमस्खलन हुआ और उसके बाद भूस्खलन हुआ, जिससे ग्यिरोंग-रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र के नेपाली और चीनी दोनों पक्षों में महत्वपूर्ण हताहत हुए और लोग लापता हो गए.
ग्लेशियर कोलैप्स और आइस-रॉक एवलांच
लैंगटांग लिरुंग पर्वत के उत्तर मुख पर लगभग 5200 मीटर ऊंचाई पर ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूटकर लगभग 1200 मीटर नीचे घाटी में गिरा. ये मलबा लेंडे खोला नदी को अवरुद्ध कर गया, जिससे अस्थायी बांध बना. बांध टूटने से पानी, कीचड़, चट्टानों और मलबे की विशाल लहर नीचे की ओर दौड़ पड़ी. लेन्दे खोला तिब्बत से निकलने वाली एक सहायक नदी है, जो नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी और तिमुरे के आसपास भोटेकोशी नदी में मिलती है. ग्लेशियर के ढहने या आइस-रॉक एवलांच से बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा इसी लेन्दे खोला में गिरा. इससे नदी में अचानक तेज बहाव पैदा हुआ.
कुछ मिनटों में बढ़ गया पानी का स्तर
ये पानी और मलबा पहले भोटेकोशी में घुसा. भोटेकोशी नदी तिब्बत से नेपाल में प्रवेश करती है और रसुवा जिले से होकर बहती है. तिमुरे के पास बाढ़ भोटेकोशी के रास्ते आगे बढ़ी. भोटेकोशी आगे चलकर त्रिशूली नदी में मिल जाती है. इसलिए वही पानी त्रिशूली में भी पहुंच गया और नुवाकोट, धादिंग जैसे निचले इलाकों तक फैला. त्रिशूली में पानी का स्तर कुछ जगहों पर 30 मिनट में 7 से 9 मीटर तक बढ़ गया था.
पहले और बाद की तस्वीरें
प्लैनेट लैब्स ने सैटेलाइट की पहले और बाद की तस्वीरें शेयर की थीं. जिसमें शुरुआती अध्ययन में भी पता चला था कि बर्फ और चट्टानों के भूस्खलन के कारण लेंन्दे नदीं में मलबे से भरी बाढ़ आई. नेपाल का राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा था- प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण पर आधारित एक शुरुआती स्टडी से पता चलता है कि नेपाल-चीन के रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में नेपाल-चीन बॉर्डर पर बर्फ और चट्टान के खिसकने (लैंडस्लाइड) के कारण ल्हेंडे नदी में ग्लेशियर से जुड़ी बाढ़ आई.
