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पश्चिम बंगाल की कंपनी पर ED का शिकंजा, 139 बैंक अकाउंट फ्रीज; 3 लग्जरी कारें भी जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी-लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड कंपनी ‘गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ (जीपीआईएल) के 139 बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए हैं. केंद्रीय एजेंसी इस मामले की कुछ समय से जांच कर रही थी. ED के बयान के मुताबिक, बैंक अकाउंट्स को फ्रीज करने का फैसला तब किया गया, जब एजेंसी के कोलकाता स्थित पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों ने इस वर्ष 5 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्य ओडिशा में नौ जगहों पर छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया.

139  बैंक अकाउंट फ्रीज

ये जगहें जीपीआईएल, उससे जुड़ी कंपनियों और उसके मैनेजमेंट से जुड़े लोगों से संबंधित थीं और मामला पश्चिम बंगाल की इस कंपनी द्वारा किए गए बैंक फ्रॉड की जांच से जुड़ा था. केंद्रीय एजेंसी ने दावा किया कि छापेमारी और तलाशी अभियान के बाद प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिवाइस और रिकॉर्ड मिले और जब्त किए गए. ईडी ने यह भी दावा किया कि जीपीआईएल से जुड़े 139 बैंक अकाउंट्स के अलावा, कॉर्पोरेट कंपनी और उससे जुड़े व्यक्तियों के नाम पर रखे गए कई म्यूचुअल फंड और शेयर भी फ्रीज किए गए.

इसके अलावा, ईडी ने दावा किया कि तीन महंगी कारें (दो मर्सिडीज और एक बीएमडब्ल्यू) भी जब्त की गईं. ईडी के बयान में कहा गया, ‘जब्त की गई सामग्री और वित्तीय लेन-देन की अभी जांच चल रही है. इस मामले में ईडी की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी.’

FIR में आरोप लगाया गया था कि जीपीआईएल ने बैंकों के एक समूह (कंसोर्टियम) से बड़ी मात्रा में फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड वर्किंग-कैपिटल सुविधाएं ली थीं, जिसमें केनरा लीड बैंक था.

कैसे हुआ हेरफेर?

कंसोर्टियम का कुल एक्सपोजर लगभग 3,590 करोड़ रुपए था, जिसमें केनरा बैंक का मंजूर किया गया एक्सपोजर लगभग 1,174 करोड़ रुपए था. ईडी का दावा है कि बाद में जीपीआईएल ने अपनी ड्रॉइंग पावर और उधार लेने की क्षमता में हेरफेर किया. ऐसा उसने बैंकों को बताए गए स्टॉक को अपने ऑडिटेड वित्तीय बयानों में दिखाए गए स्टॉक की तुलना में काफी ज्यादा दिखाकर और वर्किंग कैपिटल सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए लगभग 280 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट और ईपीसी स्टॉक को योग्य स्टॉक के रूप में शामिल करके किया.

ईडी के बयान में कहा गया है कि इसके अलावा, विवादित और संदिग्ध बकायों, जिनमें एलसीएलटी द्वारा खारिज किए गए दावे भी शामिल हैं, को ‘योग्य बकायों’ के तौर पर दिखाया जाता रहा. इसके साथ ही जीपीआईएल की ओर से बताई गई बकाया रकम में लगभग 1,115.15 करोड़ रुपए का बड़ा अंतर पाया गया, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनी ने अपनी मौजूदा संपत्ति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और इसके चलते कर्ज लेने की सीमा भी बढ़ गई.

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