मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई है. याचिकाकर्ता ने इस तरह के सभी फैसलों को निरस्त करने की मांग की है. शैलेंद्र मणि त्रिपाठी नाम के वकील की तरफ से दाखिल याचिका में ज्ञानेश कुमार समेत दूसरे अधिकारियों पर उपयुक्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई है.
त्रिपाठी ने 23 सितंबर को अखबार द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह याचिका दाखिल की है. याचिका में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, कैबिनेट सचिव, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और चुनाव आयोग की आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना को प्रतिवादी बनाया गया है.
याचिका में चुनाव आयोग के भीतर कथित प्रशासनिक मतभेदों के आधार पर कुछ फैसलों की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए गए हैं. इसके मुताबिक, नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े फैसलों को लेकर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं.
याचिका में रखी गई मुख्य बातें :-
Form 6 में बदलाव- याचिका में नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 को पिछली SIR से जोड़ने को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता का दावा है कि वैधानिक फॉर्म में यह बदलाव बिना जरूरी कानूनी प्रक्रिया के किया गया. इसे दोनों चुनाव आयुक्तों ने अनधिकृत और गैर-कानूनी बताया था.
ECINet का केंद्रीकरण- याचिका में ECINet के जरिए मतदाता डेटा के केंद्रीकरण पर भी सवाल उठाया गया है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि कानूनन वोटर लिस्ट तैयार करने और उसमें संशोधन की जिम्मेदारी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO) की होती है. दिल्ली में चुनाव आयोग के आईटी विभाग की तरफ से डेटा और सॉफ्टवेयर पर नियंत्रण बढ़ाया गया. इससे स्थानीय अधिकारियों के अधिकार प्रभावित हुए.
गोवा के मतदाताओं का ज़िक्र- याचिका में गोवा के 97 योग्य मतदाताओं का भी जिक्र है. दावा है कि सॉफ्टवेयर में रोलबैक की सुविधा नहीं होने के कारण
कोर्ट के आदेश के बावजूद इन मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में नहीं जोड़े जा सके.
पश्चिम बंगाल की 16.10 लाख अपीलें- याचिका में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल SIR के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने कई नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए थे. लेकिन चुनाव आयोग ने 16.10 लाख स्वीकृत नामों को खारिज करने के लिए अपील ट्रिब्यूनल में याचिकाएं दायर कर दीं. चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इन्हें बिना आधिकारिक मंजूरी के दाखिल बताया है.
एकतरफा फैसले रद्द करने की मांग- याचिका में कानून का उल्लंघन कर लिए गए सभी एकतरफा फैसलों को रद्द करने और Form 6 को उसके पुराने स्वरूप में बहाल करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने पश्चिम बंगाल में दाखिल 16.10 लाख अपीलों को खारिज करने की भी मांग की है.
SIT के गठन और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग- त्रिपाठी ने देश में 13 करोड़ लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटने समेत दूसरे मुद्दों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या SIT के गठन की मांग की है. याचिका में इस SIT में निष्पक्ष IT विशेषज्ञों को भी शामिल करने की मांग की गई है, ताकि ECINet और ERONet के डेटा की फॉरेंसिक जांच हो सके.
कानूनी कार्रवाई की मांग- याचिकाकर्ता ने जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई की भी मांग की है.
