प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस इस समय इंडोनेशिया की आधिकारिक यात्रा पर हैं. जकार्ता में पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के पीएम प्रबोवो सुबियांटो से मुलाकात की. जकार्ता में पीएम मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ से पीएम मोदी को सम्मानित किया गया. इसके बाद पीएम मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को भी संबोधित किया.
इंडोनेशिया के पीएम की ओर से प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में एक भोज का आयोजन किया गया था. इस दौरान इंडोनेशिया के पीएम ने प्रधानमंत्री मोदी की जमकर प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि वह पीएम मोदी के विकास कार्यों को कॉपी कर रहे हैं और अच्छे कामों को कॉपी करने पर कॉपीराइट भी नहीं आता. इस विशेष भोज के बाद पीएम मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित किया.
पीएम मोदी ने क्या कहा?
जकार्ता पहुंचे पीएम मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए कहा कि आज सुबह राष्ट्रपति प्राबोवो ने कॉपीराइट के बारे में बात की. इस प्यार, स्नेह, दोस्ती या आपसी सम्मान की भावना पर कोई कॉपीराइट नहीं हो सकता. राष्ट्रपति प्राबोवो के साथ मेरी दोस्ती कॉपीराइट की सभी सीमाओं से परे है.
पीएम ने कहा कि आज भारत और इंडोनेशिया इतिहास के एक अहम मोड़ पर साथ खड़े हैं. इस सदी का पहला दौर बीत चुका है, और आने वाले पच्चीस साल हमारे दोनों देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. आज, इंडोनेशिया की महान धरती पर आपके सामने खड़े होकर, मैं हमारे साझा विकास का विश्वास लेकर आया हूं. मैं इस संकल्प के साथ आया हूं कि भारत और इंडोनेशिया मिलकर पूरी मानवता की सेवा करेंगे.
‘भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्र ही एक पुल’
इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जो विस्तारवाद के बजाय विकास की नीति अपनाता है. हम ‘सबका साथ, सबका विकास’ की वकालत करते हैं; यानी सबकी भागीदारी के साथ सबका विकास.
आगे कहा कि आज मैं इसी मंत्र और भावना के साथ आप सभी के सामने खड़ा हूं. भले ही हमारी राजधानियां हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन समुद्र हमें केवल 150 किलोमीटर की दूरी पर अलग करता है. जहां समुद्र अक्सर दूसरे देशों के बीच एक बाधा या दूरी का कारण रहा है, वहीं भारत और इंडोनेशिया के लिए यह कभी भी अलगाव का प्रतीक नहीं रहा; बल्कि, समुद्र हमारे बीच एक पुल का काम करता है और हमारे साझा भविष्य का केंद्र है.
भारत और इंडोनेशिया के इतिहास पर पीएम मोदी ने डाला प्रकाश
इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सिर्फ समुद्र ही साझा नहीं है; हमारा इतिहास भी साझा है. हमारा रिश्ता रामायण और महाभारत की विरासत और नालंदा के प्राचीन ज्ञान से जुड़ा है. हम वायांग (Wayang), नृत्य और संगीत के साथ-साथ बोरोबुदुर और प्रम्बानन जैसे शानदार स्मारकों के माध्यम से भी जुड़े हुए हैं.
उन्होंने कहा कि हम इंडोनेशिया के राष्ट्रीय प्रतीक ‘गरुड़’ और ‘बाली यात्रा’ के उत्सव के उत्साह के माध्यम से भी जुड़े हुए हैं. जब स्वाद की बात आती है, तो यह तय करना मुश्किल है कि कौन ज़्यादा कुरकुरा है – क्रुपुक (Krupuk) या पापड़. फिर भी, एक बात निश्चित है: मसाले और ‘बुम्बु’ (bumbu) दोनों ही हमारे जीवन में अहम भूमिका निभाते हैं.
